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गर्भाधान या गर्भधारण कैसे होता है How to get pregnant in hindi

1- Pregnant kaise hote hai in Hindi me bataye.
2- गर्भधारण या गर्भाधान कैसे होता है?
3- गर्भ कैसे ठहरता है?
4- गर्भधारण कैसे होता है, हिन्दी में जानकारी दीजिए.
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7- Pregnancy ki knowledge jankari Hindi me.
उपरलिखित सवाल हमें ईमेल और कमेंट के जरिए मिले हैं, जिनका जवाब हम इस पोस्ट में देंगे. आप भी यदि गर्भावस्था या गर्भधारण से सम्बन्धित या किसी अन्य विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे सवाल पूछ सकते हैं, हम आपके सवाल का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे. अब आज के विषय पर बात करते है.

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गर्भधारण कैसे होता है
How to get pregnant

महिला और पुरूष के शारीरिक सम्बन्ध के पश्चात जब पुरुष पक्ष से निकला स्पर्म या शुक्राणु , महिला के अंडाशय (ओवरी) से निकले अंडे को निषेचित करता हैं, इसे एग फर्टिलाइजेशन होना कहते हैं और निषेचित होने के बाद जब यह अंडा गर्भाशय या सामान्य बोलचाल की भाषा में बच्चेदानी की भीतरी सतह पर स्थापित हो जाता हैं तो यह संपूर्ण प्रक्रिया ही गर्भधारण (Get Pregnant) या गर्भाधान कहलाता है.
गर्भधारण की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज हुआ अंडा, गर्भाशय में एक बच्चे के रूप में बढ़ना शुरू होता है तथा नौ महिने के पश्चात संपुर्ण रूप से नवजात के रूप में विकशित होकर इस दुनिया में जन्म लेता है.
यह तो हो गया गर्भधारण या गर्भाधान कैसे होता है (how to get pregnant in hindi) का संक्षिप्त जवाब, अब इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.
सामान्यतः गर्भधारण या गर्भाधान के लिए महिला के चार प्रजननांगों का महतत्वपूर्ण भूमिका होती है-
1- डिम्बग्रंथि या ओवरी
2- डिम्बवाहिनी नली या फैलोपियन ट्यूब
3- गर्भाशय या यूट्रस
4- योनि या वेजिना

महिला के गर्भाशय में डिंबग्रंथि या अंडाशय अथवा ओवरी नाम की दो फली के आकार की ग्रथियां होती हैं. ओवरी का आकार हमेशा समान नहीं रहेता है, ओवरी का साइज मासिक धर्म तथा अन्य कारणों से हमेशा बदलता रहता है. स्वस्थ दोनों ओवरीस में मिलाकर लगभग चार लाख अण्डे होते हैं, जो किशोरावस्था आने तक सोए रहते हैं अथवा सुप्त अवस्था में पड़े रहते है.
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दोनो ओवरीज के ही नजदीक में फैलोपियन ट्यूब या डिम्बवाहिनी नली होती है जो लगभग साढ़े पांच इंच लंबी पतली सी नली होती है. डिंबवाहिनी नली का एक तरफ का सिरा डिमबग्रंथि के नजदीक होता है तथा दूसरी तरफ का सिरा यूट्रस अतार्थ गर्भाशय में मिला हुआ होता हैं.
जब किसी लड़की का मासिकधर्म शुरू होता है तो, यह इस बात का लक्षण होता हैं कि लड़की का यूट्रस अतार्थ गर्भाशय अब गर्भधारण करने के लिए तैयार है. कियोंकि जब किसी लड़की की किशोरावस्था शुरू होती है तो डिमबग्रंथियों में सुप्त अवस्था में सोए हुए अंडे जाग जाते हैं और चेतन होकर एक निश्चित समय के बाद ओवरी से बाहर निकलने की चेष्टा करते हैं. यह समय हर लड़की या महिला के लिए अलग अलग हो सकता है लेकिन सामान्यतः 28 दिनों के अंतराल से दोनों डिमबग्रंथियों में से किसी एक डिमबग्रंथि से एक अंडा पककर बाहर निकलता है तथा किसी महिला या लड़की के मासिकधर्म के 8-10 दिनो के बाद तक डिमबग्रंथियों से निकला यह अंडा डिमबग्रंथि के अंदर छोटी सी पुटिका में बंद होकर आगे बढ़ता रहता है. जब यह अंडा पक जाता है तो यह छोटी सी पुटिका फट जाती है तथा यह अंडा डिमबग्रंथि से अलग हो जाता है. जब पका हुआ अंडा डिमबग्रंथि से बाहर निकलता है तो डिम्बवाहिनी के एक तरफ सिरे पर उपस्थित रेशे, उस पके अंडे को पकड़कर डिंबवाहिनी के अंदर डाल देते है तथा डिंबवाहिनी से यह अंडा गर्भाशय में आता है. इस संपूर्ण प्रक्रिया में तीन से छह दिन का समय लगता है तथा इस संपूर्ण प्रक्रिया को ओवुलेशन क्रिया कहते हैं और इस समय को ओवुलेशन पीरियड कहते हैं.
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ओवुलेशन पीरियड के समय महिला व पुरुष शारीरिक संबध बनाने पर पुरुष के वीर्य से निकले करोड़ों की संख्या में शुक्राणु गर्भाशय में प्रवेश करते हैं तथा गर्भाशय से फैलोपियन ट्यूब में पहुंचते है तथा इन करोड़ों शुक्राणु में से एक या दो शुक्राणु वहां पर उपस्थित अंडे में मिल जाता है. यह करोड़ों शुक्राणु डिंबवाहिनी ग्रंथि में उपस्थित अंडे से मिल जाने का प्रयास करते हैं परन्तु करोड़ों शुक्राणुओं में से एक या दो शुक्राणु ही अंडे तक पहुंचने में कामयाब हो पाते हैं. शुक्राणुओं को महिला व पुरुष के शारीरिक सम्बन्ध बनाने के पश्चात अंडे तक पहुंचने में एक या दो दिन का समय लग सकता है. इसके बाद जब भी कोई शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब में उपस्थति अंडे के नजदीक पहुंचता है, तो दोनों आपस में मिलने की कोशिश करते हैं कियोंकी अंडे और शुक्राणु में परस्पर आकर्षण तत्व होते हैं. जो शुक्राणु अंडे के पास पहुंचता है, वो अपने सिर को अंडे की सतह में गडाकर तथा गोल घूमकर, अंडे की सतह में छेद करता हुआ अंदर घुसता है तथा वो फैलोपियन ट्यूब से निकलकर गर्भाशय के अंदर आ जाता है और अब यह एक भ्रूण कहलाता हैं.
जब यह सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो यह गर्भाधान या गर्भधारण कहलाता हैं. गर्भधारण के पश्चात महिला मासिकधर्म का चक्र बंद हो जाता है. इस तरह एक महिला गर्भवती होती है तथा नौ महीने में गर्भाशय में भ्रूण के विकास के बाद नवजात शिशु का जन्म होता है.

आज की पोस्ट गर्भधारण, गर्भाधान कैसे होता है, आपको कैसी लगी, हमें जरूर बताएं. यदि आपका कोई सवाल अथवा संदेह हो तो हमे जरूर बताएं, हम आपके हर सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगे. प्रेगनेंट कैसे होते हैं, से सम्बन्धित कुछ महत्वपर्ण पोस्ट निम्न है-

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