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मेनोपॉज मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण

इस पोस्ट में हम मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण, मासिक धर्म में रुकावट, मासिक धर्म का रुकना, मासिक धर्म का न आना – हार्मोनल असंतुलन आदि के बारे में जानकारी देंगे. मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण के बारे में जानने से पहले हम जानते हैं कि महावारी के बंद होने का क्या अर्थ है.
मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण, मासिक धर्म न आना, मासिक धर्म में रुकावट, मासिक धर्म का न आना – हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म का कम आना, 40 के बाद मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन, मासिक धर्म का बंद हो जाना

मेनोपॉज क्या है या मासिक धर्म न आना क्या है?
सामान्यतः माना जाता है की 45 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के पश्चात महिलाओं में माहवारी आना बंद हो जाता है जिसे मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति कहते हैं तथा आम बोलचाल की भाषा में मासिक धर्म का रुकना या मासिक धर्म का बंद हो जाना कहते हैं. 40 के बाद मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन आना शुरु हो जाता है, भारत की महिलाओं में मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति की औसत आयु 49 वर्ष होती है. यानी मेनोपॉज की सही उम्र औसतन 49 साल होती है. साधारण शब्दों में समझें तो जब किसी महिला के शरीर में ओवरी का कार्य करना बंद हो जाता है यानी अंडे रिलीज होना बंद हो जाता हैं अतार्थ सारे अंडे समाप्त हो जाते हैं तो मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति कहलाता है. लेकिन 45 वर्ष से पहले ही मासिक धर्म में रुकावट होना साधारण स्थिति नहीं होती हैं. मासिक धर्म का न आना – हार्मोनल असंतुलन भी एक वजह हो सकती है. अब आप यह तो समझ गए होंगे कि मेनोपॉज क्या है?

प्री-मैच्योर मेनोपॉज यानी समय से पहले मासिक धर्म में रुकावट
अब तक आपने जाना कि 40 के बाद मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है और मेनोपॉज यानी मासिक धर्म का रुकना किसी भी महिला के शरीर के लिए एक स्वाभाविक परिवर्तन होता है, जो सामान्यत 45 वर्ष की उम्र के बाद होता है. लेकिन कई बार 45 वर्ष की उम्र से पहले ही मासिक धर्म में रुकावट हो जाती है जिसे प्री-मैच्योर मेनोपॉज या प्री-मेनोपॉज कहा जाता है और इसकी मुख्य कारण कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी, आनुवंशिक कारणों, धूम्रपान आदि हो सकते है. मासिक धर्म का न आना – हार्मोनल असंतुलन, जैसे एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा का कम होन की वजह से भी हो सकता है.

मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण या मेनोपॉज के लक्षण इन हिंदी
मासिक धर्म का रुकना यानी मेनोपॉज के लक्षण हैं अनियमित माहवारी, घबराहट रहना, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, पेशाब नहीं रोक पाना, स्तन में सूजन व दर्द होना आदि. इनका विस्तार से वर्णन आगे करते हैं.
मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण में प्रमुख निम्नलिखित हैं-
  • सेक्स की इच्छा कम हो जाना या बिल्कुल खत्म हो जाना भी मासिक धर्म के बंद होने का लक्षण होता है. मेनोपॉज के बाद शारीरिक संबंध से महिला को दर्द व असहजता का अनुभव होता है.
  • अनियमित माहवारी आना मेनोपॉज का प्रमुख लक्षण होता है. माहवारी बंद होने के शुरुआती लक्षण यह है की महिलाओं में पीरियड्स अनियमित आने शुरू हो जाते हैं और इस दौरान ब्लीडिंग भी काफी कम हो जाती है जिससे पता चलता है की आप मेनोपॉज की तरफ जा रहे हैं.
  • मेनोपॉज यानी मासिक धर्म का न आना – हार्मोनल असंतुलन के कारण भी हो सकता है. इससे अवसाद, चिंता व तनाव आना शुरू हो जाता है तथा मानसिक स्थिति में अस्थिरता आने लगती है.
  • माहवारी बंद होने का लक्षण यह भी है की इस समय महिलाओं को पेशाब रोकने में परेशानी होती है तथा पहले की तुलना में अधिक बार पेशाब की शिकायत रहती है.
  • अधिक गर्मी लगना तथा तापमान में वृद्धि होना भी मेनोपॉज का लक्षण होता है. इसकी वजह से थकान और पसीना अधिक निकलने की शिकायत रहती है.

प्री-मैच्योर मेनोपॉज यानी समय से पहले मासिक धर्म बंद होने के कारण
समय से पहले मासिक धर्म बंद होने के कई कारण होते हैं जो निम्नलिखित है-
  • बड़ी उम्र में शादी करना और बच्चे पैदा करना प्री-मैच्योर मेनोपॉज का कारण होता है.
  • आईवीएफ, आईवीआई भी मासिक धर्म न आना का कारण हो सकता है.
  • आनुवांशिक कारणों से भी मासिक धर्म में रुकावट आ सकती है.
  • डायबिटीज, थायरॉयड, , ब्लड प्रेशर, ओवरी संक्रमण के कारण मासिक धर्म का बंद हो जाना भी एक प्रमुख कारण होता है.
  • रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की वजह से भी मासिक धर्म के बंद होने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
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आज की पोस्ट में हमने मेनोपॉज की वजह से मासिक धर्म का बंद हो जाना तथा इसके लक्षण व कारण के बारे में जानकारी प्रदान दी है जो आपको कैसी लगी, इस पर अपने विचार अवश्य प्रकट करें.

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