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गर्भपात के बाद लक्षण । गर्भपात का कारण । मिसकैरिज कैसे होता है

गर्भपात अथवा मिसकैरेज हो जाना एक बहुत ही दुखद घटना होती है. गर्भपात के बाद किसी भी महिला का मानसिक रूप से उभरना काफी कठिन काम हो जाता है. इसके साथ ही महिला को शारीरिक रूप से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आज की पोस्ट में हम गर्भपात क्या है (Miscarriage meaning in hindi) और गर्भपात के बाद लक्षण (Miscarriage symptoms in hindi) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे. साथ ही यह भी जानेंगे की तीसरे, दूसरे, पहले महीने में गर्भपात के बाद लक्षण क्या हैं. इन सब के साथ ही गर्भपात होने के कारण भी जानेंगे यानी वो कौनसी वजह है जो पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है.

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गर्भपात का अर्थ । Miscarriage meaning in hindi

गर्भपात के बाद लक्षण जानने से पहले हम जानते हैं की गर्भपात का अर्थ (Miscarriage meaning in hindi) क्या है तो इसका शाब्दिक अर्थ है की समय से पूर्व गर्भ के समापन को गर्भपात कहते हैं, इसके अंतर्गत गर्भाशय से भ्रूण अपने आप ही प्रकृतिक तरीके से निकल जाता है या कृत्रिम तरीके से निकाल दिया जाता है. मिसकैरेज के बाद गर्भावस्था की समाप्ति हो जाती है. यदि मिसकैरेज गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह में होता है तो यह प्रारंभिक गर्भपात या अर्ली मिसकैरेज कहलाता है और यदि मिसकैरेज 12 सप्ताह के बाद होता है तो यह लेट मिसकैरेज कहलाता है. इस तरह आप मिसकैरिज का हिंदी मीनिंग जान चुके हैं, अब इससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं.

मिसकैरेज यानी गर्भपात कब होता है

गर्भपात होने का कोई निर्धारित समय नही होता है यह पूरी प्रेगनेंसी में कभी भी हो सकता है. प्रारंभिक गर्भपात यानी कि गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह में गर्भपात या मिसकैरेज होने की संभावना ज्यादा रहती है. वहीं शुरुआती गर्भपात की तुलना में, लेट मिसकैरेज होने की संभावना काफी कम हो जाती है. यानी कि ज्यादातर मामलों में गर्भावस्था की पहली तिमाही में गर्भपात हो जाता है यानी पहले 12 सप्ताह में ही मिसकैरेज हो जाता है. आगे हम चर्चा करेंगे की पहले महीने में गर्भपात के बाद लक्षण (Garbhpat ke lakshan in hindi) क्या है.

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गर्भपात कैसे होता हैं (Miscarriage kaise hota hai)

कौनसी वजह पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है तथा यह एक सामान्य जिज्ञासा सब के मन में होती है की गर्भपात कैसे होता हैं (Miscarriage kaise hota hai) तथा इसके क्या कारण होते हैं. अचानक होने वाले गर्भपात का कोई ठोस या उपयुक्त कारण नहीं होता है. ऐसे गर्भपात को रोकने का उपाय का भी कोई निश्चित या सटीक उपाय या इलाज भी नहीं होता है. अक्सर देखा जाता है कि उन गर्भवती महिलाओ को भी गर्भपात हो जाता है जो पूर्ण रूप से स्वस्थ होती हैं. फिर भी कुछ ऐसे कारक होते हैं जो गर्भपात या मिसकैरेज होने का कारण बनते हैं. मिसकैरिज कैसे होता है यानी गर्भपात होने के कारण निम्नलिखित हैं-
  • गर्भपात होने के कारण में प्रमुख है गुणसूत्रों की गलत संख्या होना, यानी गुणसूत्र के असामान्यताओं या फिर किसी एक गुणसूत्र की संरचना में परिवर्तन होने से मिसकैरिज हो जाता है. कई बार गुणसूत्र की असमानता ही पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है यानी इस तरह का मिसकैरेज सामान्यतः प्रेगनेंसी के पहले 10-12 सप्ताह में हो जाता है.
  • अधिक उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में गर्भपात होने की संभावना ज्यादा रहती है.
  • यदि गर्भवती महिला स्वस्थ नही होती है या कोई अन्य गंभीर बीमारी होती है तो भी मिसकैरेज होने की संभावना बढ़ जाती है.
  • गर्भावस्था के दौरान कुछ सब्जियां भी मिसकैरेज होने का खतरा बढ़ाती है जिनके बारे में विस्तार से आप हमारे पिछले लेख प्रेगनेंसी में कौन सी सब्जी नहीं खानी चाहिए में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
  • गर्भपात होने के कारण में कुछ अन्य कारणों में गर्भवती महिला का ज्यादा वजन का होना यानी मोटापा होना, मधुमेह तथा थायराइड की बीमारी होना भी पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है.
  • यदि किसी महिला को गर्भाशय संबंधी कोई बीमारी या कुछ अन्य असामान्यताएं हो तो मिसकैरेज होने की संभावना रहती है.
  • गर्भवती महिला को यौन संचारित संक्रमण से भी गर्भपात होने का खतरा रहता है.
  • अधिक मात्रा में धूम्रपान, शराब तथा अन्य नशीली चीजों का सेवन भी गर्भपात होने के कारण बनती है.
  • प्रेगनेंट महिला की प्रेगनेंसी डाइट में अधिक मात्रा में कैफीन यानी कॉफी तथा ग्रीन टी लेने से भी मिसकैरिज होने का खतरा रहता है.
  • प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली विभिन्न जांचो के साइड इफेक्ट्स भी कई बार पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है या बन सकता है.
  • कुछ फ्रूट्स जैसे पपीता, अन्नानास आदि खाने से भी गर्भपात की संभावना जताई जाती है जिनके बारे में आप हमारे लेख प्रेगनेंसी में कौन सा फ्रूट नहीं खाना चाहिए में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते है.
  • कुछ हानिकारक भोजन सामग्री जैसे डिब्बाबंद मछली, कच्चा दूध, विटामिन सी की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ आदि का सेवन भी पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है.
  • कुछ दवाइयां भी गर्भपात होने के कारण बनती है जैसे आईबुप्रोफेन और अन्य दर्द निवारक गोलियां आदि. प्रेगनेंसी के दौरान इन दवाइयों का बिना डॉक्टर की सलाह के उपयोग में लेने से भी मिसकैरिज होने का खतरा रहता है.
इस प्रकार आपने अब तक इस पोस्ट में यह जान लिया होगा की गर्भपात कैसे होता हैं (Miscarriage kaise hota hai) तथा इसके कारण क्या है. अब हम गर्भपात के लक्षण (Miscarriage symptoms in hindi) के बारे में जानेंगे.
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गर्भपात के बाद लक्षण । Garbhpat ke lakshan in hindi । Miscarriage symptoms in hindi

कई महिलाओं का सवाल होता है कि गर्भपात के बाद मुझे कैसे पता चलेगा कि मिसकैरिज हो गया है, तो इस हेतु गर्भपात के बाद लक्षण से जान सकते हैं जैसे कि ब्लीडिंग शुरू होना, पेट में मरोड़ चलना, माहवारी जैसे लक्षण दिखाई देना आदि. हालांकि सिर्फ इस तरह के लक्षण का मतलब यह नहीं है की यह गर्भपात के बाद लक्षण ही हैं. इसलिए इस बात का सही से पता लगाने हेतु डॉक्टर से संपर्क जरुर करें ताकि विभिन्न जांचों की मदद से कंफर्म हो सके की गर्भपात हुआ है अथवा नहीं क्योंकि शुरुआती गर्भपात यानी कि अर्ली मिसकैरेज के लक्षण को पकड़ना थोड़ा मुश्किल होता है.
गर्भपात होने के बाद लक्षण (Miscarriage symptoms in hindi) निम्नलिखित होते हैं-
  • प्रेगनेंट महिला के वेजिना से ब्लीडिंग होना यानी खून आना शुरू हो जाना गर्भपात का लक्षण हो सकता है.
  • गर्भवती महिला के पेट के निचले हिस्से में मरोड़ आना या दर्द बना रहना भी मिसकैरेज का लक्षण (Miscarriage symptoms) हो सकता है.
  • गर्भवती महिला को पेशाब करते समय यदि तेज दर्द महसूस हो तो यह भी गर्भपात के बाद लक्षण हो सकता है.
  • प्रेगनेंट स्त्री के पैरो में, मुख्यतः टखनों में तेज दर्द उत्पन्न होना भी मिसकैरेज का लक्षण (Miscarriage symptoms) होता है.
  • यदि आपको पीरियड आने जैसे लक्षण दिखाई दे जैसे गर्भावस्था में पेट दर्द, खून के धब्बे दिखाई देना आदि भी गर्भपात होने के संकेत हो सकता है.
  • गर्भवती महिला के वेजिना से सफेद या गुलाबी रंग का स्त्राव होना भी गर्भपात होने का लक्षण हो सकता है.
  • इसके अलावा गर्भवती महिला के वजन में अचानक कमी होना, उसके ब्रेस्ट की सरंचना का कड़ा होना, भ्रूण की हार्टबीट बंद होना या भ्रूण के मूवमेंट में कमी आना गर्भपात के मुख्य लक्षण होते हैं.
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इस प्रकार आज की पोस्ट गर्भपात के बाद लक्षण तथा गर्भपात होने के कारण के बारे में थी जिसमे आपने ऐसे कारकों के बारे में जाना जो पहली तिमाही में गर्भपात का कारण बनता है या बन सकता है. गर्भपात अर्थ क्या है (Miscarriage meaning in hindi) और Miscarriage symptoms in hindi के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की. अगर आपको किसी अन्य विषय पर हिंदी में जानकारी प्राप्त करनी हो तो आप बेझिझक हमारे से संपर्क कर सकते हैं.

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