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बाल मजदूरी पर हिन्दी कहानी भाग 1

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Ganesh (Delhi)
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ऊपर लिखित सवाल हमें पाठको से प्राप्त हुए हैं, जिसके जवाब में हम बाल मजदूरी पर हिन्दी में कहानी नाटक व ड्रामा स्क्रिप्ट लिख कर आपके सामने आने वाली पोस्ट में प्रस्तुत करेंगे।

बाल मजदूरी पर हिंदी कहानी भाग 1 
Story on Child Labour in Hindi 
सुरेश और जमुना देवी  का परिवार रामपुरा गांव मे रहता है. उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. सुरेश पास के शहर में भवन निर्माण का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता है. उनके दो बच्चे है बडी बेटी सुरभि और छोटा बेटा-अनिल. बड़ी बेटी सुरभि की उम्र 13 साल है जो गांव के ही स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ती है और यह पढाई में बहुत होशियार है.
सुरेश कई दिनों बाद गांव में अपने घर वापस आया है. यह बहुत ही कमजोर हो गया है. पत्नी  के जोर देने पर उसने बताया डॉक्टर को दिखाने से पता चला कि उसे लीवर की बीमारी हो गयी है और यह कोई भी मेहनत का काम नहीं कर सकता है. इस पर जमुना देवी ने सुरेश को काम पर नहीं जाने दिया और कहा कि घर पर रहकर ही दवा खाये और आराम करे.
अब मजदूरी का काम वह खुद ही करने लगी. इससे परिवार की स्थिति ओर खराब हो गयी. जमुना देवी की मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण ठीक से नहीं हो पा रहा था इसलिये जमुना देवी ने न चाहते हुए भी बड़ी बेटी सुरभि का स्कूल छुडा दिया. वह उसे अपने साथ काम पर ले जाने लिये मजबूर हो गई ताकि परिवार की आय में कुछ बढ़ोतरी हो सके.
सुरभि आगे की पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन परिवार की हालत देखते हुए उसने भी माँ के साथ मजदूरी कर परिवार की मदद करना कुछ उचित समझा.इस तरह गरीबी की वज़ह से एक होनहार बच्ची बाल मजदूरी के चपेट में आ गई।
एक दिन किसी अन्य जगह पर मजदूरी करने वाला सुरेश का दोस्त उससे मिलने उसके घर आया तो पता चला की सुरेश तो बीमार है. परेशानियों को देखकर उसने जमुना देवी को बताया कि सुरेश तो 'कर्मकार कल्याण बोर्ड' में पंजीकृत है और इस बोर्ड के द्वारा मजदूरों को लाभ पहुंचाने के लिये विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इनमें से 2-3 योजनाओं का नाम भी बताया जिनसे सहायता मिल सकती है.
इन योजनाओं से लाभ लेने हेतु जमुना देबी ने अपनी बेटी की शिक्षा को जारी रखने के लिए और अपने बीमार पति के इलाज हेतु सहायता के लिए तुरंत ही 'कर्मकार कल्याण बोर्ड' में आवेदन किया. इसके फलस्वरूप जमुना  देवी की बड़ी बेटी सुरभि को 'मेधावी छात्र पुरस्कार योजना' से मेधावी पुरस्कार के रूप में धनराशि दी गयी जिसके द्वारा उसने मजदूरी छोडकर आगे की पकाई पढ़ाई अच्छे नम्बरों से पास होकर पूरी की और 'गंभीर बीमारी सहायता योजना' से लाभ लेकर सुरेश का इलाज भी अच्छे से चल रहा है.
अब जमुना देवी को घर चलाने में परेशानियों कम होने लगी है और बच्ची को भी अपने साथ मजदूरी पर नहीं ले जाना पडता है. साथ ही उसके पति का इलाज समय पर होने के कारण स्वास्थ्य भी ठीक होता जा रहा है. यह जल्दी ही काम करने के योग्य हो जायेगा.
इस तरह जानकारी के अभाव में लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते है तथा खराब आर्थिक स्थिति की वजह से बच्चो को बाल मजदूरी के दलदल में फंसा देते हैं। 

बाल मजदूरी पर अन्य हिन्दी कहानिया 
बाल मजदूरी हमारे ऊपर पर एक अभिशाप है. इस विषय पर हमने कुछ और कहानियां लिखी है जिन्हे आप यहां पर पढ़ सकते हैं
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