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बाल मजदूरी पर हिन्दी कहानी भाग 3

जैसा कि आपको पता है कि बाल मजदूरी पर कहानियों की श्रंखला शुरू की है, इस विषय पर हमने कहानियों, नाटक, ड्रामा स्क्रिप्ट आदि लिखा है। इस हेतु हमें निम्न सवाल प्राप्त हुए थे।
1- बाल मजदूरी पर हिंदी स्टोरी लिखिए।
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बाल मजदूरी पर हिन्दी कहानी भाग 3 
Story on child labour in Hindi 
सपना का पति मनोज शहर में सब्जी का ठेला लगाता था और उसका बाकी परिवार गांव में ही रहता था । बच्चे गांव के ही स्कूल में पढते थे । बडा बेटा दीपू अभी नयी कक्षा में गया ही था कि मनोज ने ये कह कर उसे शहर बुला लिया कि यहाँ पढ भी लेगा और उसके काम में हाथ भी बंटा देगा । परीक्षा पास करने के लिए दीपू प्राईवेट कोचिंग करने लगा ।

अब दीपू सुबह पिता के साथ मंडी में सब्जी खरीदने जाता, दिन भर फेरी लगाता और शाम छ: बजे जब उसके पिता एक जगह ठेला खडा करके सब्जी बेचते, तब यह कोचिंग कं लिए जाता । बाप-बेटा एक कोठरीनुमा कमरे में रहते थे जंहा पर न तो लाईट की खास व्यवस्था थी और न ही शौचालय की । इस तरह वो बाल मजदूरी करने लगा और पढ़ाई से दूर होता गया।

शहर आकर दीपू का मन पढ़ने ने नहीं लगा । यहाँ पर पढ़ने का न तो वक्त मिलता था और न ही कोई वातावरण था । गांव के स्कूल में दीपू पढाई में अच्छा था, पर यहां पढाई करना तो दूर उसके लिए जीना तक मुश्किल हो गया था । नतीजतन जब वह दसवीं की बोर्ड परीक्षा में फेल हो गया तो पिता ने उसे कहा ‘बेटा अब पढने-लिखने का खास फायदा नहीं । इस शहर में दसवीं पास लोग भी देहाडी पर मजदूरी कर रहे है । मुझे ही देख अनपढ़ जरुर हुं पर घर का गुजारा तो चला रहा हूं। अगर सब्जी बेचने के काम में मन नहीं लग रहा तो तेरे लिये कोई और काम दूंढता लूं। दीपू ने हामी भर दी। इस तरह बाल मजदूरी की वजह से एक और बच्चा शिक्षा से वंचित हो गया।
फिर दीपू को, जो की मात्र 15 साल का था को शहर के बाहर एक पत्थर खदान में काम पर लगा दिया । यहीं उसका मुख्य काम पत्थर तोडने का था । यहाँ काम की स्थितियां बडी कठिन थीं । दिन भर पत्थर तोड़ने से दीपू के शरीर का रोम रोम दर्द करने लगता । शाम को जब वह बापस आता तो निढाल होकर खाट पर लेट जाता । इस पत्थर खादान में काम करते-करते दो साल गुजर गये । दीपू न केवल कमजोर हो गया, बल्कि उसे लगातार खाँसी की शिकायत रहने लगी । फिर उसकी एक बडे सरकारी अस्पताल में जांच करायी गई ।
डॉक्टर ने कहा "पत्थरों मैं उड़ने वाली रेतीली धूल की वजह से उसके फेफडों को नुकसान पहुंचा है । अस्पताल आने में देर होता तो और नुकसान हो जाता ।' उन्होंने दवाएं लिखी और दीपू को घर जाकर आराम करने की सलाह दी । उन्होंने दीपू के पिता से कहा, ‘अगर तुम अपने बच्चे तो बाल मजदूरी न कराते तो ये दिन देखने को नहीं मिलते। अब तुम उसकी आगे कि पढाई जारी रखो ।' दीपू के पिता ने हामी भरी और दीपू को वापिस स्कूल में भर्ती करवाया। वो बाल मजदूरी के कारण होने वाले नुकसान को समझ चुके थे।

चर्चा के बिंदु-
० बाल श्रम  किसे कहते है? 
० बाल श्रम के क्या कुप्रभाव होते है? 
० बाल श्रम के जोखिमपूर्ण रूप क्या है?
० अशिक्षा और बाल मजदूरी का दुुुुसचक्र पीढी-दर--पीढी कैंसे चलता है?
० बाल मजदूरी के दुुुुसचक्र को कैंसे तोडा जा सकता है?
० शिक्षा का क्या महत्व है?

यह कहानी आप को कैसी लगी हमें जरूर बताएं। बाल मजदूरी पर कई कहानीयां हमने पहले और लिखी है जिसे आप यहां से पढ़ सकते हैं- 
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