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बाल मजदूरी पर हिन्दी कहानी भाग 5

 बाल मजदूरी की समस्या पर हिंदी में कहानी लेखन हेतू हमें काफी सवाल मिले, जो कुछ इस तरह हैं। 

1- बाल मजदूरी पर हिन्दी भाषा में कहानी लिखिए। 
2- बाल मजदूरी व बाल श्रमिको पर कहानी हिंदी भाषा में और हिन्दी फोन्ट में लिखे। 
3- Bal majduri par story hindi me likhe.
4- Bal Mazdoori par hindi story likhiye.
5- Write a story on child labour in hindi language in Hindi Font.
6- बाल मजदूरी पर हिंदी नाटक या ड्रामा स्क्रिप्ट लिखिए.

बाल मजदूरी पर हिन्दी कहानी भाग 5
Hindi story on child labour
बनवारीलाल के पिता एक गरीब किसान थे । कुछ गरीबी की वजह से और कुछ शिक्षा का महत्व न समझ पाने की वजह से ये बच्चो को पढा-लिखा नहीं पाये । इसलिये बनवारीलाल को मात्र 12 साल की उम्र में ही भट्रटे में काम करना पडा । इस तरह बनवारीलाल को बाल मजदूरी करनी पड़ी। कुछ बडा हुआ तो एक रिश्तेदार ने पास के शहर में एक रासायनिक खाद के कारखाने में उसे हेल्पर लगा दिया । आज वह 40 साल का हो चुका है और उसी फैवट्ररी में काम करता है । उसके दो बच्चे है, एक लडका और एक लडकी । बेटा सोनू 15 साल का है और बेटी प्रभा 12 साल की, दोनों पास के नगर निगम स्कूल में पढते हैं ।
छोटी उम्र से ही कठोर मेहनत के कारण अब बनवारीलाल का स्वास्थय जवाब देने लगा है । यह अक्सर सोचता है काश मेरे बेठे को भी कोई छोटी-मोटी नौकरी मिल जाती तो, मेरा बोझ कुछ हल्का तो हो जाता । यानी जिस बाल मजदुरी की वजह से वो भुगत रहा है, वो ही बाल मजदूरी अपने बेटे से कराकर उसे भी बाल मजदूर बनाने हेतु वो तैयार हो गया। बनवारीलाल की पत्नी, सांवली देबी बडी सुशील और बुद्धिमान स्त्री थी । वह यह नहीं चाहती थी कि उसके बच्चे भी अपने पिता की तरह बाल मजदुर करकेी बाल श्रमिक बने । उसने फोरन उपने पति को उसके मन की बात बताई। एक दिन अकले में उससे बोली तो क्या तुम चाहते हो कि हमारा सोनू बाल श्रमिक बने? वो भी बाल मजदूरी करे? बनवारीलाल ने कहा घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है और इधर मेरा स्वास्थ्य भी कुछ ठीक नहीं रहता । सोनू को कुछ छोटे-मोटे काम में लगाने की सोच रहा था । सांवली देवी बोली, कल मैं अपनी सहेली जो आस-पास के घरों में रोटी बनाने और साफ-सफाई का काम करती है, के साथ काम की तलाश में गयी थी । दो घरों में काम मिल भी चुका है । सिलाई-कढ़ाई का काम तो मैं करती ही हुं। इससे घर का खर्च चलाने में तुम्हारी मदद भी हो जायेगी और सोनू की पढाई भी नहीं छूटेगी । अब तुम कुछ दिन की छुट्टी लो और स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपना ईलाज कराओ । 
इस तरह सांवली देवी घरों में रोटी बनाने और साफ-सफाई का काम करने लगी । दोपहर के बाद यह घर पर ही सिलाई का काम भी करती रही । इस तरह उनकी गृहस्थी को एक नया जीवन मिल गया । सोनू ने बारहवीं पास कर ली और शिक्षक-प्रशिक्षण केन्द्र में उसे दाखिला मिल गया । कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना कीं मदद से प्रभा अपनी स्कूल की पढाई पूरी कर सकती है ।
आज सांवली देवी गर्व से सर उठा कर कह सकती है कि पढी-लिखी न होते हुए भी उसने अपने बच्चों को ना केवल बाल श्रमिक बनने तो रोका बल्कि शिक्षा दिला कर आत्मनिर्भर बनाने में उनकी मदद भी की ।
आस-पडोस के परिवार के लिये बनवारीलाल का परिवार एक मिसाल बन चुका है । इसका श्रेय सांवली देवी को जाता है । सांवली सबको यही सलाह देती है की शिक्षा के महत्व को जानो, इसी में छिपी है भविष्य की कुंजी ।


चर्चा के बिंदु - 
० शिक्षा का हमारे जीवन में क्या महत्व है? यह बाल मजदूरी को रोकने में किस तरह मददगार है। 
० बाल श्रम या बाल मजदूरी के क्या दुस्प्रभाव होते हैं?
० अशिक्षा और बाल मजदूरी का दुष्चक्र पीढी-दर-पीढी कैसे चलता है?
० बाल मजदूरी के इस दुसचक्र को कैंसे तोडा जा सकता है?

बाल मजदूरी पर अन्य कहानियां-
बाल मजदूरी की समस्या पर कहानी लेखन हेतु काफी पाठको के सवाल आ रहे थे। इसलिए हमे बाल मजदूरी पर हिंदी में कहानियां उपलब्ध कराई है जिसे आप यहां पर पढ़ सकते हैं-

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